
"मखाना का मुख्य केंद्र पूर्णिया, किशनगंज, अररिया, कटिहार ही है। दरभंगा, मधुबनी में 300-400 साल पुराना इतिहास है मखाना का, लेकिन अभी जल स्तर काफी कम हो गया है वहां।"

भारत सरकार के National Cooperative Database पर मौजूद आकड़ों के अनुसार, बिहार में 29 तरह की कुल 25,580 सहकारी समितियां हैं।

कटिहार जिले के समेली प्रखंड के पूर्वी चांदपुर पंचायत के विषनीचक गांव में बीते तीन दिनों से हो रही तेज बारिश और आंधी तूफान ने केला किसानों की कमर तोड़ दी है।

भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के मंत्री प्रल्हाद जोशी और बिहार सरकार की खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेशी सिंह के बीच 26 सितंबर, 2024 को नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में शिष्टाचार मुलाकात की गई।

गन्ना उद्योग विभाग के मंत्री कृष्ण नंदन पासवान ने घोषणा की है कि बिहार राज्य गुड़ उद्योग प्रोत्साहन के तहत 81 गुड़ इकाइयों के लिए 12.40 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

बिहार सरकार के सहकारिता विभाग द्वारा खरीफ 2024 मौसम के लिए "बिहार राज्य फसल सहायता योजना" के तहत ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

कटिहार जिले के सात पैक्स (प्राथमिक कृषि साख समिति) अध्यक्षों पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी और उनके भविष्य में चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगेगा।

किसानों ने कहा कि सरकार को उनकी समस्याएं सुननी चाहिए और उचित मुआवजा देकर उन्हें हौसला देना चाहिए। किसान हसन रज़ा कहते हैं कि सैलाब से ज़्यादातर किसानों की फसल बर्बाद हो गई है, और दोबारा रोपाई करने के लिये किसान आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं, इसलिये सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिये।

कोसी में पैदा होने वाला मक्का गुणवत्तापूर्ण होता है, जिस कारण यहां के मक्के की मांग पंजाब, महाराष्ट्र, कर्नाटक सहित अन्य राज्यों में भी होती है। साथ ही यहां से मक्का पड़ोसी देश नेपाल, बंग्लादेश और भूटान भी भेजा जाता है।

विधानचंद्र राय ने बताया कि एक एकड़ की खेती करने में उन्हें करीब 3 लाख रुपये का खर्च आता है। थाईलैंड सेब की खेती करने वाले वह जिले के पहले किसान हैं। उनकी सफलता से प्रभावित होकर आसपास के दूसरे किसान भी अब इन फलों को उगाना चाहते हैं।

जिन लोगों के कच्चे मकान के परखच्चे उड़े हैं, वे लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। आंधी की वजह से नसीमा ख़ातून के घर के बाहरी हिस्से पर एक पेड़ गिर गया। चूल्हा घर की छत भी उड़ गयी। नसीमा ने बताया कि आंधी बहुत तेज़ थी, जिससे वह घबरा गई थीं, क्योंकि उनके पास कहीं जाने का कोई विकल्प नहीं था।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि आग बेलवा पंचायत के एक गांव में लगी और फैलकर मादरगाछी गांव होते हुए आबादपुर पंचायत के मिस्त्री टोला तक पहुंच गई। तेज़ हवा के कारण आग बहुत तेज़ी से बढ़ती गई और कई बीघा जमीन में फैली फसलों को तबाह कर गई जिससे किसानों को लाखों का नुकसान हुआ है।