एक तरफ बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारियां ज़ोर-ओ-शोर से चल रही हैं तो दूसरी तरफ राज्य में पुल ध्वस्त होने का सिलसिला जारी है। ताज़ा मामला अररिया का है जहां फारबिसगंज प्रखंड स्थित कौवाचार घाट पर बना एक पुल का हिस्सा पिछले सप्ताह धंस गया।
पुल का मध्य पाया बैठ जाने से इस मार्ग पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह से ठप हो चुका है। स्थानीय लोगों ने बताया कि 129 मीटर लंबा यह पुल वर्ष 2019 में 3.80 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया था जो छह साल भी नहीं टिक सका।
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पुल धंस जाने से लोगों को अब करीब 8 किलोमीटर का लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर बीमारों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ा है, जिन्हें स्कूल और अस्पताल पहुंचने में काफी मुश्किलें हो रही हैं। इसके अलावा आसपास के सैकड़ों किसान भी अपनी फसलें बाजार तक नहीं ले जा पा रहे हैं।
इस क्षेत्र में पुल धंसने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले 18 जून 2024 को सिकटी के पड़रिया में बकरा नदी पर बन रहा 12 करोड़ रुपये की लागत वाला पुल भी धंस गया था। दोनों ही पुलों का निर्माण ग्रामीण कार्य विभाग ने कराया था। परमान नदी पर बने इस पुल के धंसने से ग्रामीण सरकार से खासा नाराज़ हैं और जल्द से जल्द पुल के पुनर्निर्माण की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि इससे उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई है। खेतों की कटाई, व्यापारिक गतिविधियां और बच्चों की पढ़ाई पर भी इसका गहरा असर पड़ा है। पुल टूट जाने के बावजूद कई ग्रामीण अब भी जोखिम उठाकर इसी रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं।
इस मामले में ग्रामीण कार्य विभाग के इंजीनियर चंद्रशेखर कुमार ने बताया कि पुल धंसने की रिपोर्ट विभाग के उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। आगे उन्होंने कहा कि पुल धंसने के समय संवेदक की पांच साल की गारंटी अवधि खत्म हो चुकी थी, लेकिन पुल की आयु और गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी।
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