पूर्वी भारत के तीन राज्य उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाली 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को हरी झंडी मिल गई है। गोरखपुर से सिलीगुड़ी तक बनने वाली इस 6-लेन एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 525.59 किलोमीटर होगी। इसके लिए 100 मीटर चौड़े राइट ऑफ वे (ROW) बनाने की भी योजना है।
यह एक्सप्रेसवे कुशीनगर, मोतिहारी, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज और बागडोगरा जैसे क्षेत्रों को राष्ट्रीय परिवहन नेटवर्क से जोड़ेगा। इस परियोजना में 42 बड़े पुल, 191 छोटे पुल, 284 अंडरपास, 12 आरओबी, 29 इंटरचेंज निर्माण की योजना है।
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इस परियोजना के लिए 990 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होना है। एक्सप्रेसवे के अलाइनमेंट के लिए 87.5% कृषि भूमि का प्रयोग होगा। परियोजना की संभावित लागत 37,465 करोड़ रुपये बताई गई है।
यह 6-लेन एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के तीन जिलों के कुल 195 गांवों जबकि बिहार के 8 जिलों के कुल 337 गांवों से गुज़रेगा। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग और जलपाईगुड़ी के 15 गांव को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।
सीमांचल के किशनगंज और अररिया के लोग इस एक्सप्रेसवे से लाभान्वित होंगे। किशनगंज के बहादुरगंज, टेढ़ागाछ, ठाकुरगंज और पोठिया क्षेत्र के 63 गांव जबकि अररिया जिले के नरपतगंज, फ़ारबिसगंज, कुर्साकाटा, सिकटी और प्लासी के 44 गांव से एक्सप्रेसवे गुज़रेगा।
बता दें कि 22 नवंबर 2021 को एनएचएआई अध्यक्ष की बैठक में इस परियोजना के लिए प्रारंभिक सहमति दी गई थी। इसके बाद साइट सर्वे और विभिन्न प्रस्तावों के मूल्यांकन के आधार पर अलाइनमेंट में सुधार किया गया।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस परियोजना में कोई मौजूदा सड़क उपयोग नहीं की जाएगी, जिससे ट्रैफिक बाधाएं नहीं होंगी।
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