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बिहार में 125 यूनिट मुफ्त बिजली मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का मास्टरस्ट्रोक या मजबूरी?

आकंड़ों के अनुसार बिहार की बिजली वितरण कंपनी एनबीपीडीसीएल को 2022 में 6,881 करोड़ रुपये का वित्तीय घाटा हुआ था जो 2023 में बढ़कर 7,089 करोड़ रुपये हो गया।

syed jaffer imam Reported By Syed Jaffer Imam |
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125 units of free electricity in bihar masterstroke or compulsion of chief minister nitish kumar

बिहारवासियों को अब मुफ्त बिजली मिलने वाली है। विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घोषणा की है कि 1 अगस्त 2025 से बिहार के सभी घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली दी जाएगी। राज्य के 1 करोड़ 67 लाख परिवारों को 125 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करने के लिए कोई पैसे नहीं देने होंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट से यह जानकारी दी।


अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा, “हमलोग शुरू से ही सस्ती दरों पर सभी को बिजली उपलब्ध करा रहे हैं। अब हमने तय कर दिया है कि 1 अगस्त, 2025 से यानी जुलाई माह के बिल से ही राज्य के सभी घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट तक बिजली का कोई पैसा नहीं देना पड़ेगा। इससे राज्य के कुल 1 करोड़ 67 लाख परिवारों को लाभ होगा।”

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उन्होंने अगले तीन वर्षों में राज्य के सभी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सोलर एनर्जी प्लांट लगाने की घोषणा करते हुए लिखा, “हमने यह भी तय किया है कि अगले तीन वर्षों में इन सभी घरेलू उपभोक्ताओं से सहमति लेकर उनके घर की छतों पर अथवा नजदीकी सार्वजनिक स्थल पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाकर लाभ दिया जाएगा।”


इन योजनाओं के साथ साथ बिहार के मुख्यमंत्री ने कुटीर ज्योति योजना के तहत बेहद गरीब परिवारों के लिए सोलर संयंत्र लगाने का पूरा खर्च उठाने का भी एलान किया है। राज्य सरकार के अनुमान के अनुसार अगले तीन वर्षों में 10 हजार मेगावाट तक सौर ऊर्जा उपलब्ध की जायेगी।

गरीब परिवारों को मिलेगा फायदा

बिहार जाति सर्वें के अनुसार बिहार में 94 लाख परिवारों की मासिक आय 6,000 रुपए से भी कम है। 1 अगस्त से 125 यूनिट मुफ्त बिजली मिलने से इन गरीब परिवारों के लिए एक बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।

“बिहार जैसे गरीब प्रदेश में इस तरह की योजनाओं को फ्रीबीज़ कह कर इसका आलोचना करना आसान नहीं होगा। बिहार में इस तरह की योजनाओं की ज़रूरत भी है। गरीबों के लिए बहुत बड़ी राहत है।”

नुकसान में बिजली वितरण कंपनियां

पिछले वर्ष आम आमदी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने सदन में विद्युत मंत्री से पिछले पांच सालों में राज्य स्वामित्व वाले बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) को होने वाले वित्तीय घाटे के आंकड़ें मांगे। इसके जवाब में विद्युत् राज्य मंत्री श्रीपद नायक ने कुछ आंकड़े साझा किये।

उन आकंड़ों के अनुसार बिहार की बिजली वितरण कंपनी एनबीपीडीसीएल को 2022 में 6,881 करोड़ रुपये का वित्तीय घाटा हुआ था जो 2023 में बढ़कर 7,089 करोड़ रुपये हो गया। राज्य की दूसरी बिजली वितरण संस्था एसबीपीडीसीएल को 2022 में 12,656 करोड़ रुपये का नुक्सान हुआ जो अगले वर्ष बढ़कर 12,234 करोड़ रुपये हो गया।

बिहार में कुल घाटे की बात करें तो 2023 बिहार ने 19,322 करोड़ रुपये का वित्तय घाटा झेला जो कि 2022 के मुकाबले थोड़ा कम था। 2022 में बिहार में 19,537 करोड़ रुपये का नुक्सान हुआ था। बिहार में बिजली वितरण कंपनियों को हो रहे घाटे में लगातार वृद्धि देखने को मिली है। 2019 में 12,258 करोड़ रुपये का वित्तीय घाटा हुआ जो 2020 में बढ़कर 14,673 करोड़ रुपये हो गया। 2021 में ये आंकड़ा 17,160 करोड़ रुपये तक पहुँच गया था जिसके बाद 2022 में घाटे में फिर से (19,537) वृद्धि हुई और 2023 नुक्सान का आंकड़ा (19,322) मामूली तौर पर घटा।

बिजली में हो रहे नुकसान के बावजूद बिहार सरकार की इस घोषणा पर यह सवाल ज़रूर उठता है कि सरकार मुफ्त बिजली देने के बाद घाटों की बढ़ोतरी के लिए बजट कहां से लाएगी क्योंकि 125 यूनिट बिजली मुफ्त देने से राज्य सरकार के खजाने पर सालाना लगभग 4500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। वहीं, दूसरी तरफ सोलर एनर्जी प्लांट लगवाने की घोषणा को भविष्य बिजली विभाग में हो रहे घाटों को कम करने की तरफ एक बड़े प्रयास के तौर पर देखा जा सकता है।

पिछले कुछ हफ़्तों में नीतीश सरकार ने कुछ ऐसी घोषणाएं की हैं जिन्हें चुनाव से पहले मतदाताओं को लुभाने का प्रयास माना जा रहा है। बीते महीने बिहार कैबिनेट की बैठक में ‘बिहार निःशक्तता पेंशन योजना’ के तहत 40% या उससे अधिक दिव्यांगता वाले सभी दिव्यांगजनों को 400 रुपये प्रतिमाह पेंशन की जगह 1100 रुपये देने की घोषणा की। वहीं इसी महीने में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के सभी सरकारी पदों पर बिहार मूल निवासी महिलाओं के लिए 35% आरक्षण देने का भी एलान किया।

पलटा मुख्यमंत्री का मन

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पूर्व में कई बार मुफ्त बिजली देने की आलोचना करते रहे हैं। उन्होंने एक बार विधानसभा में खड़े हो कर कहा था कि मुफ्त बिजली देने से बुरा काम और कोई हो ही नहीं सकता।

मुख्यमंत्री ने तब कहा था, “बिजली कभी मुफ्त में नहीं देनी चाहिए। कम दर पर देना चाहिए लेकिन मुफ्त नहीं देना चाहिए। इससे बढ़कर कोई दूसरा ग़लत काम हो ही नहीं सकता। यह काम पंजाब ने शुरू किया और क्या बुरा हाल पंजाब ने अपना कर लिया। दिल्ली में अगर किसी को वोट मिल गया कि ‘200 (यूनिट) तक हम बिजली मुफ्त में दे देंगे’, और उसकी क्या स्थिति होने वाली है यह किसी को पता नहीं है।”

एक और दिलचस्प बात यह है कि कुछ दिनों पहले ही बिहार सरकार के वित्त विभाग ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मुफ्त बिजली देने के दावों का खंडन किया था। पत्र में लिखा गया, “कतिपय संचार माध्यमों में इस प्रकार की सूचना प्रसारित हो रही है कि वित्त विभाग द्वारा प्रत्येक माह 100 यूनिट मुफ्त बिजली प्रदान किये जाने के प्रस्ताव पर सहमति प्रदान की गयी है। ऐसी कोई सहमति वित्त विभाग द्वारा नहीं दी गयी है… इस प्रकार यह खबर कि वित्त विभाग द्वारा 100 यूनिट के प्रस्ताव पर सहमति दी गयी है, भ्रामक तथा तथ्यों से परे प्रतीत होता है।”

मुख्यमंत्री के इस ह्रदय परिवर्तन पर राजनीतिक विश्लेषक महेंद्र सुमन ने ‘मैं मीडिया’ से कहा, “मुख्यमंत्री के कार्यकाल में अगर ध्यान दिया जाए तो, वह फ्रीबीज़ नहीं देते हैं। उनके बहुत सारे बयान भी हैं जिसमें उन्होंने इसका काफी सख्त विरोध किया है। यह बहुत स्पष्ट है कि ये सब उनकी घोषणा नहीं है।”

वह आगे कहते हैं, “ये सारा कुछ चुनाव को देख कर हो रहा है। तेजस्वी यादव ने इंडिया गठबंधन का अजेंडा बनाया था कि सरकार में आएंगे तो पेंशन 1,500 रुपये कर देंगे। इसके अलावा माई-बहिन योजना और 200 यूनिट मुफ्त बिजली की भी बात कही गई थी। ये घोषणाएं काफी लोकप्रिय भी हो रहीं थी।”

कमज़ोर हुए हैं मुख्यमंत्री?

महेंद्र सुमन मानते हैं कि बिहार के चुनावी समीकरण में एनडीए गठबंधन में नीतीश कुमार लगातार कमज़ोर हो रहे हैं इसलिए इस तरह की योजनाएं देखने को मिल रही हैं।

“अगर नीतीश जी मज़बूत होते तो शायद चंद्रबाबू नायडु की तरह वह इसका विरोध करते। एनआरसी के मामले में भी उन्होंने कहा था कि, ‘हम बिहार में इसको लागू नहीं करेंगे।’ 2014 के बाद देश भर में नरेंद्र मोदी और भाजपा की अभूतपूर्व वृद्धि के साथ बिहार में नीतीश जी एनडीए की गठबंधन में लगातार कमज़ोर हुए हैं। आने वाले विधानसभा चुनाव में नीतीश जी तूफानी अभियान कर पाएंगे, ऐसा लगता नहीं है,” महेंद्र सुमन ने कहा।

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सैयद जाफ़र इमाम किशनगंज से तालुक़ रखते हैं। इन्होंने हिमालयन यूनिवर्सिटी से जन संचार एवं पत्रकारिता में ग्रैजूएशन करने के बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता (पीजी) की पढ़ाई की। 'मैं मीडिया' के लिए सीमांचल के खेल-कूद और ऐतिहासिक इतिवृत्त पर खबरें लिख रहे हैं। इससे पहले इन्होंने Opoyi, Scribblers India, Swantree Foundation, Public Vichar जैसे संस्थानों में काम किया है। इनकी पुस्तक "A Panic Attack on The Subway" जुलाई 2021 में प्रकाशित हुई थी। यह जाफ़र के तखल्लूस के साथ 'हिंदुस्तानी' भाषा में ग़ज़ल कहते हैं और समय मिलने पर इंटरनेट पर शॉर्ट फिल्में बनाना पसंद करते हैं।

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